क्या आपके अंदर आत्म विश्वास की कमी है और हमेसा नकारात्मक ख्याल आते है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपके अंदर 100 % बदलाव आएगा (how to increase self - confidence and self esteem)

क्या आपके अंदर आत्म विश्वास की कमी है और हमेसा नकारात्मक ख्याल आते है इस पोस्ट को पढ़ने से आपके अंदर  100 % बदलाव आएगा
 (how to increase self - confidence and self esteem)
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believe in youself

नकारत्मकता , अब एक मर्ज बन चुकी है. ऐसी मर्ज जिसे समझकर इलाज कर पाना उतना आसान नहीं होता. ये तब और कठिन हो जाता है , जब नकारात्मकता खुद के लिए हो. वो भी इतनी की अपने हर कदम की आलोचना की जाने लगे. कैसे इससे उबरे, आइये जानते है.

खुद से इतनी नाराजगी क्यों - 

मुझमे कितनी खराबियाँ है. न अच्छा दीखते है और न ही कोई हुनर है. खाना भी अच्छा नहीं बना पाते.  कार भी नहीं चलानी आती. मुझसे तो कुछ भी नहीं होता. मई पूरी तरह से बेकार हू. 
आप भी कई बार खुद के लिए ऐसा सोचते होंगे पर यही कमिया अगर हर कदम पर तलाशी जाये तो क्या होगा? आपका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट जायेगा. आपको खुद में कुछ अच्छा नहीं लगेगा तो भविष्य को लेकर अपेछाये भी नहीं रहेंगी. दरअसल , कई लोगो की आदत होती है खुद में बुराई तलाशना. वैसे तो खुद की आलोचना खुद में सुधार के मौके देती  है , लेकिन खुद में सिर्फ कमियों की तलाश करते हुए उन्हें हावी होने देना आत्मविश्वाश को चोट पहुँचाना है. इसको ऐसे समझ सकते है की टीवी पर किसी को डांस करते या गाना गाते देखकर लगेगा की , मुझे  तो कुछ नहीं आता. या किसी खिलाडी को ओलम्पिक जीतते देख स्पोर्ट्स में करियर न बना पाने को लेकर खुद को कोसने लगते है. इतना ही नहीं, महिलाये अपने बच्चे के बर्थडे केक बाजार से लाती है, घर पर नहीं बनाती, जैसी बाते सोचकर खुद को कमतर महसूस करने लगती है. तो खुद की इस स्तर की आलोचना करके आप गलत कर रहे है. खुद की कमियों को देखिये, पर सिर्फ सुधार के लिए. जैसे केक बनाना नहीं आता तो सोचिये की अगली छुट्टियों में बेकिंग क्लास जरूर ज्वाइन कर लुंगी.  आत्मलोचन में माहिर लोगो का जिंदगी के प्रति रवैया कुछ ऐसा होता है. 
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दुसरो से पहले खुद को हरा देना - 

परीछा में काम या ख़राब नंबर आने पर लोग इसके कलिये तरह तरह के बहाने बनाते है. कोई कहता है पेपर कठिन आया था या टीचर इतने सख्त थे की पूरी तयारी के बाद भी पेपर अच्छा नहीं हुआ  या फिर जो सवाल आये , वो तो सिलेबस में थे ही नहीं. मतलब वो अपनी हार के लिए पेपर से टीचर तक को जिम्मेदार ठहराएगा. मगर खुद की आलोचना करने वाले लोग इसके लिए सिर्फ और सिर्फ खुद को जिम्मेदार मानते है. वे काम नंबर आने का दोष किसी और को नहीं, सिर्फ खुद को देते है. ऐसे लोग कहते है, मैंने शायद पढाई में अपना 100 % नहीं दिया या टीचर का तो काम ही है सख्ती से पढ़ाना. भले ही सिलेबस से बहार से सवाल आये हो पर किताब में तो सब था न, मैंने नहीं पढ़ा ये वो सोच है जो साबित करती है की आप दुसरो से पहले खुद को हरा देते है. खुद की इतनी आलोचना भी ठीक नहीं होती है. 

दुसरो से तुलना -

ऐसे लोग खुद को सफल और असफल इस आधार पर मानते है की उन्होंने दुसरो की तुलना में कैसा प्रदर्शन किया है. वो खुद में संतुष्ट होते ही नहीं है और अपनी जिंदगी के हर पहलू की तुलना किसी और से करते रहते है. ऐसे में भले ही वे खुद सफल हुए हो, पर यह सफलता उनके लिए सिर्फ इसलिए बेकार हो जाएगी, क्योकि जिससे वो खुद की तुलना कर रहे है , उसे थोड़ी ज्यादा सफलता मिल गई . दरअसल , उनकी नकारत्मकता उन्हें खुद को सफल मानने ही नहीं देगी. वो छोटी से छोटी चीज़ में खुद की दुसरो से तुलना करेंगे.  फिर चाहे लम्बाई हो या फिर रंगत . परीछा में आने वाले नंबर हो या फिर आत्मविस्वाश . दरअसल , नकारत्मकता की चादर ओढ़ने वाले लोग खुद पर जरा भी रहम नहीं करना चाहते है. ये सब कुछ परफेक्ट पाना चाहते है. ऐसी लोगो को समझना होगा की तुलना सिर्फ खुद को प्रेरित करने के उद्देस्य से की जानी चाइये, खुद को नकारात्मक बनाने के लिए नहीं. 

प्रदर्शन पर पड़ता है असर -

आत्मलोचन के शिकार लोग खुद को कभी भी साबित नहीं कर पाते है. ये हमेशा ही अपना 100 प्रतिशत देने  में पीछे छूट जाते है. उनकी इस स्थिति को सालो तक नकारत्मक रवैया अपनाने के परिणाम के तौर पर देखा जा सकता है. कह सकते है की नकारत्मकता उनकी आदत बन जाती है . इसका एक असर ये भी  होता है की ऐसे लोग अपने बारे में दुसरो से हमेशा अच्छी बाते सुनने की चाह रखते है. वो चाहते है की उनके हर एक अच्छे काम के लिए उन्हें सराहा जाये. 

ऐसे करे सुधार -

अभी तक आप खुद से कहते थे की आप ये काम नहीं कर सकते है. पर अब आपको कहना होगा की शायद ये काम मै बहुत अच्छे से कर सकता हू. 

1 - अपने लिए बहुत वास्तविक लछ्य रखे. लक्छ्य छोटे होने चाइये ताकि उन्हें जल्द पूरा  करके आप खुद को प्रोत्शाहित कर सके.

2 - भविष्य को लेकर नकारत्मक होना बंद  करे किसी काम से सिर्फ इसलिए पीछे न हटें की हो सकता है आप उसमे असफल हो जाये. 

3 - अपनी छोटी से छोटी सफलता को कही लिखे ताकि अपने अच्छे कामो को जरुरत के समय याद करके आप प्रोत्साहित हो सके. 

4 - मुझे ये काम करना चाइये की जगह बोलिये मै ये काम करना चाहता हू . इस तरह के वाक्य आपको आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते है. 
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Milan Tomic

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