योग करने के फायदे जानकर दंग रह जायेंगे आप ( Benifits of yog ) - बाबा रामदेव जी

योग करने के फायदे जानकर दंग रह जायेंगे आप ( Benifits of yog )


योग करे स्वस्थ रहे 
benifits of yog

तनाव भरी जिंदगी में शारीरक - मानसिक रोग होना आम बात है . कई समस्याएं खासकर महिलाओ में ज्यादा पाई जाती है. इसका प्रमुख कारण है महिलाओ की विशिस्ट शारीरक बनावट. अपनी सेहत से जुडी परेशानियों को योग की सहायता से कैसे दूर करे आइये जानते है 

जोड़ो की परेशानिया होंगी दूर -

जोड़ो में , विशेषकर साइनोवियल जोड़ में सूजन , जलन या दर्द होने को अथराइटिस कहते है . यह ऐसा रोग है जो धीरे - धीरे जोड़ो को पूरी तरह छतिग्रस्त कर देता है . इस रोग में दर्द , लाली गर्माहट व सूजन की समस्या होती है , जिसमे उन जोड़ो को हिलाना- डुलाना भी मुश्किल हो जाता है . आर्थराइटिस कई प्रकार का होता है , जिनमे एक्यूट आर्थराइटिस , आस्ट्रियो आर्थराइटिस , रूमेटाइड आर्थराइटिस तथा गाउट प्रमुख है . महिलाओ में अस्थियो का आर्थराइटिस तथा रूमेटाइड आर्थराइटिस होने की आशंका अधिक होती है . इसका प्रमुझ कारण असंतुलित आहार , व्यायाम की कमी , मानिसक तनाव तथा हार्मोनल का असंतुलन है. आर्थराइटिस से मुक्ति पाने में पवनमुक्तासन , शाशाकन , वज्रासन  आदि योगासन उपयोगी साबित होते है . इसके अतिरिक्त अपनी शक्ति के अनुसान सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास समस्या से मुक्त होने के लिए पर्याप्त है .


पवनमुक्तासन की अभ्यास विधि - 

पीठ के बल जमीन पर सीधा लेट जाये. इसके पशचात एक लम्बी तथा गहरी सास ले . अब बाए पैर को घुटने से मोड़कर इसे दोनों हाथो से पकडे तथा हाथो से घुटने को अंदर की और खींचकर छाती की और लाने का प्रयास करे. इसके तुरंत बाद सर को इतना ऊपर उठाये की नाक को स्पर्श करे. इस स्थिति में सांसो को सामान्य रखते हुए आरामदायक समय तक रुके . इसके बाद वापस पूर्व स्थिति में आये. अब यह क्रिया दाए पैर से भी करे. इसके बाद दोनों पैरो से एक साथ करे. यह  पवनमुक्तासन का एक चक्र है .  शुरुवात एक चक्र से करे. धीरे-धीरे चक्रो की संख्या बढ़ाकर 10  से 15 तक कर दे . जिन्हे तीव्र घटिया है , वे पवनमुक्तासन करते समय घुटनी को हाथो से ऊपर न पकडे . ऐसे लोग घुटनो को नीचे हाथ से पकड़े .


प्राणायाम -

आर्थराइटिस के रोगी उदार स्वसन , भस्रिका ,तथा नाड़ी शोधन , प्राणायाम का अभ्यास करें. ये पाचन शक्ति  बढ़ाकर नाड़ियो में प्राणशक्ति को बढ़ाते है तथा उनके अवरोधों को दूर करते है .


आहार - 

हल्की अनाज जैसे बाजरा, जौ, गेहू, चपाती, दलिया, हरी सब्जियां, गिरिदारफल , थोड़े सूखे मेवे आदि ले . दूध , दूध से बने पदार्थ डिब्बा बंद भोजन, मांस, मछली, प्याज , मूली, अदरक, खट्टा फल, बैगन, गोभी, तथा टमाटर आदि न ले .


गिरते बाल नहीं करेंगे परेशान- 

आजकल बाल झड़ने की समस्या कुछ ज्यादा होती जा रही है . इसका प्रमुख कारण असंतुलित आहार , सर पे रक्त संचार की कमी , साबुन - शैम्पू, तथा सौंदर्य प्रसाधनों का अधिक प्रयोग , बालो का संक्रमण तथा अधिक मानसिक तनाव आदि है .कुछ योगिक क्रियायो के नियमित अभ्यास से इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है . बालो को झड़ने से खत्म किया जा सकता है . बालो को झड़ने से रोकने के लिए सर्वांगासन , पादहस्तासन , शीर्षासन , हलासन, पर्वतासन , भुजगासन , धनुरासन तथा त्रिकोणासन का नियमित अभ्यास करे. 


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पादहस्तासन की अभ्यास विधि - 

सीधे खड़े हो जाये . एक गहरी और लम्बी सांस ले और छोड़े. दोनों हाथो को खींचकर सर को ऊपर की और ले जाएँ . इसके बाद हाथो के साथ धड़ को आगे की और इस प्रकार झुकाये की दोनों हथेलियों पैरो के बगल में जमीन पर आ जाये तथा माथा घुटने को स्पर्श करे. इस स्थिति में आरामदायक समय तक रूककर वापस पूर्व स्थिति में आएं, इस आसान को तीन  आबृतियो का अभ्यास करें.  पादहस्तासन के अभ्यास के बाद भुजंगासन ,धनुरासन या हस्त उत्तनासन का अभ्यास करना चाइये. स्लिप डिस्क के रोगी आगे झुकने वाले आसनो का अभ्यास न करे. 


प्राणायाम- 

बालो को गिरने से रोकने के लिए फायदेमंद प्राणायाम है नाड़ीशोधन , उज्जई या सरल नाड़ीशोधन प्राणायाम, जिसका अभ्यास कोई भी कर सकता है .


आहार- 

सदा, सुपाच्य , संतुलित तथा पौष्टिक आहार ले . ककड़ी , गाजर , पत्ता गोभी , मेथी तथा चुकंदर की सब्जी का सेवन करे. साथ ही नियमित दूध , दही, घी, मीठे फल तथा प्रोटीन युक्त आहार भी ले .


सर दर्द हो जायगा ख़त्म - 

सर दर्द का एक सबसे महत्वपूर्ण प्रकार माइग्रेन है. माइग्रेन के तहत समय समय पर उठने वाले अत्यंत तीव्र सर दर्द की विशेसता यह है की दर्द आधे सर में ही होता है तथा इसके साथ उल्टिया तथा आँखों में धुंदलापन पाया जाता है . यह रोग स्त्रियो में अधिक पाया जाता है . इस रोग का प्रमुख कारण हार्मोनल परिवर्तन , भावुकता , मानसिक तनाव , हीं भावना से पीड़ित होना, अपच तथा वंशानुगत होता है . सूर्य नमस्कार , पवनमुक्तासन , शशांकासन , प्रणामासन , जानुशिरासन , आकर्ण धनुरासन तथा भुजगसन आदि का अभ्यास सर दर्द में काफी फायदेमंद होता है .


कमर दर्द का अंत - 

पीरिड्स, गर्भावस्था, बच्चे के जन्म के बाद या फिर मेनोपॉज के दौरान महिलाये कमर दर्द की परेशानी से ग्रस्त रहती है . इसके अतिरिक्त रसोई आदि के कार्यो को अधिक देर तक खड़े होकर करना , काम काजी महिलाओ का अधिक देर तक ऑफिस में कुर्सी पर बैठना या कम्प्यूटर पर अधिक देर तक काम करना आदि कारण भी इस समस्या को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है .


आसान-  

जब कमर दर्द अधिक हो तो रोगी को आसनो का अभ्यास न कर केवल मकरासन में लेट जाना चाइये . जैसे जैसे दर्द कम होता जाये  , अर्ध शलभासन , सर्पासन , सरल धनुरासन , वज्रासन भूगंजासन , उष्ट्रासन , मेरुवक्रासन आदि को अपने अभ्यास में जोड़ लेना चाइये .


अर्ध शलभासन की अभ्यास विधि - 

पेट के बल जमीन पर लेट जाये . सर को सीधा जमीन पर रखे. दोनों हाथो की हथेलियां जांघो के निचे जमीन पर रखे . गहरी सांस ले कर छोड़े . अब एक पैर को सीधा जमीन से ऊपर उठाये . पांच सेकंड तक इस स्तिथि में आये . यह क्रिया दूसरे पैर से भी करे. 


प्राणायाम-  

बहुत तीव्र कमर दर्द की स्थिति में मकरासन में यौगिक स्वसन का अभ्यास करना चाइये . जब रोगी उठने बैठने की स्थिति में हो जाये उसे वज्रासन या कुर्सी पर बैठकर नाड़ीशोधन या उज्जई प्राणायाम का अभ्यास करना चाइये . जब तक रोग ठीक न हो जाये, तब तक रोगी को पद्मासन , सिद्धासन , सुखसान में न तो बैठने चाहिए न ही प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए .



आहार- 

हल्का तथा अर्ध तरल भोजन ले, सब्जियों का रास , सूप , खिचड़ी दलिया आदि सर्वोत्तम आहार माने जाते है . जाइए जैसे रोग ठीक होता जाये , चावल दाल, सब्जी , को आहार में शामिल किया जा सकता है . प्रोटीन युक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए .
                                                                                          
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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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